लोग तेजी से विकसित और आधुनिक हो रहे है, ऊर्जा और जुनून ऐसा कि उनके रास्ते में समय और परिवेश बाधक नहीं बनते, दूसरी तरफ प्रशासन व सुरक्षा तंत्र के आधुनिकीकरण और विकास की रफ्तार बहुत धीमी, फिर भला घटनाएँ कैसे कम होंगी ! दोनों रफ़तारों में सामंजस्य होना चाहिए। या तो व्यवस्था चेत जाए या फिर लोग सचेत हो जाए...